आज का पंचांग
आज का हिन्दू पंचांग: तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार। 2026 का दैनिक पंचांग निःशुल्क। लाहिरी अयनांश पर आधारित, IST (भारतीय समय) के अनुसार।
30 तिथियाँ
| क्र. | तिथि | पक्ष | महत्व |
|---|---|---|---|
| 1 | प्रतिपदा | शुक्ल | नए कार्य शुरू करना |
| 2 | द्वितीया | शुक्ल | यात्रा के लिए शुभ |
| 5 | पञ्चमी | शुक्ल | विद्या के लिए शुभ |
| 11 | एकादशी | शुक्ल/कृष्ण | उपवास; भगवान विष्णु की पूजा |
| 15 | पूर्णिमा | शुक्ल | पूर्ण चन्द्रमा; पूजा-व्रत |
| 30/अमावस्या | अमावस्या | कृष्ण | पितृ तर्पण; नया चन्द्र |
पंचांग कैलेंडर — तिथि दर्शन
पंचांग के बारे में
हिन्दू पंचांग एक सौर-चन्द्र (Lunisolar) कैलेंडर प्रणाली है। यह सूर्य और चन्द्रमा दोनों की स्थितियों पर आधारित है। पंचांग का उपयोग विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार, व्यापार शुरू करने जैसे शुभ कार्यों की तिथि और मुहूर्त तय करने के लिए किया जाता है।
यह पंचांग लाहिरी अयनांश पर आधारित है, जो भारत में सरकारी रूप से मान्य है और अधिकांश ज्योतिष गणनाओं में उपयोग किया जाता है। सटीक समय IST (भारतीय मानक समय, UTC+5:30) के अनुसार है।
किसी विशेष शुभ मुहूर्त के लिए जैसे विवाह, नए व्यापार, घर खरीदना — कृपया किसी स्थानीय पंडित या ज्योतिषी से सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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पंचांग (Panchang) हिन्दू पारम्परिक कैलेंडर और पंचांग-ज्योतिष का मेल है। 'पंच' यानी पाँच और 'अंग' यानी भाग। इसके पाँच अंग हैं: वार (सप्ताह का दिन), तिथि (चन्द्र तिथि), नक्षत्र (चन्द्रमा की स्थिति), योग, और करण। पंचांग का उपयोग विवाह, गृहप्रवेश, व्यापार शुरू करने जैसे शुभ कार्यों की तिथि तय करने के लिए किया जाता है।
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तिथि चन्द्र माह की एक इकाई है। एक चन्द्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं — शुक्ल पक्ष में 15 (प्रतिपदा से पूर्णिमा तक) और कृष्ण पक्ष में 15 (प्रतिपदा से अमावस्या तक)। प्रत्येक तिथि तब पूर्ण होती है जब चन्द्रमा सूर्य से 12 डिग्री आगे बढ़ जाता है।
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नक्षत्र 27 चन्द्र-मंडल हैं जिनसे चन्द्रमा प्रतिमाह गुज़रता है। प्रत्येक नक्षत्र आकाश के 13°20' को कवर करता है। चन्द्रमा लगभग 27.3 दिनों में सभी 27 नक्षत्रों से होकर गुज़रता है। रोहिणी, पुष्य और उत्तरा फाल्गुनी विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।
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एकादशी हर चन्द्र पक्ष की 11वीं तिथि होती है। महीने में दो एकादशी आती हैं — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में। वैष्णव परम्परा में एकादशी को उपवास का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
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राहु काल (Rahu Kaal) दिन के आठ भागों में से एक अशुभ काल है। प्रत्येक दिन एक राहु काल होता है जो लगभग 1 घण्टे 30 मिनट का होता है। इस दौरान नए कार्य शुरू करना अशुभ माना जाता है।